विज्ञापन

गुनाह है

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दुनिया में हर किसी को बस खुशी की चाह है
        
                                                    
                            
इन्सान मगर ग़म के महल में तबाह है
वह फूल जो किताब में दिखा है अर्से बाद,
गुजरे हुए लम्हों का अकेला गवाह है
गुनाह हमसे हो रहे हैं अफसोस है मगर
हमपर हुआ भी जुल्म कहीं बेपनाह है
तकदीर की अंधी गली में भीड़ बेशुमार
तदबीर के अंगारे बिछी सूनी राह है
हम बेतकल्लुफी में ठुकराए गए वहां
मकसद बिना भी मिलना जहां पर गुनाह है
3 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile