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धूल की गोद में हर सुब्ह सिमट जाता हूं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अक्सर दूसरी दुनिया में चला जाता हूं
        
                                                    
                            
लौट कर वापस जमीं पे उतर आता हूं
जो भी हासिल हुआ नहीं इस दुनिया में
वो सभी चीजें खयालों में बहुत पाता हूं
काबिल रहने के, है या नहीं है ये दुनिया
सोचते सोचते दुनिया में जिए जाता हूं
आशिकी, रंजिशें, ठोकरें, शोहरतें यहां
जो मिल जाता है बेशर्त लिए जाता हूं
ओस की बूँदों सा,पत्तों से लुढ़ककर मैं तो
धूल की गोद में हर सुब्ह सिमट जाता हूं
एक महीने पहले
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