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मैं तुम्हारी, जिंदगी हूं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दर्द की तहरीर हूं मैं
        
                                                    
                            
या अनोखी, पीर हूं मैं
तू नदी का, इक किनारा
और दूजा, तीर हूं मैं
खुद को ही, बांधे हुए हूं
खुद की ही, जंजीर हूं मैं
हो जुदा तुझसे,भटकता
हूं ,तेरी तकदीर हूं मैं
मैं तुम्हारी, जिंदगी हूं
ख्वाब की, ताबीर हूं मैं
म्यान से ,अब तक न निकली
वो कोई, शमशीर हूं मैं
प्यास की, कोई तड़प हूं
और, बहता नीर हूं मैं
दूर मुझको,ढूंढता क्या
तेरे,बगलगीर हूं मैं
3 घंटे पहले
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