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मैं तुम्हारी, जिंदगी हूं

                
                                                         
                            दर्द की तहरीर हूं मैं
                                                                 
                            
या अनोखी, पीर हूं मैं
तू नदी का, इक किनारा
और दूजा, तीर हूं मैं
खुद को ही, बांधे हुए हूं
खुद की ही, जंजीर हूं मैं
हो जुदा तुझसे,भटकता
हूं ,तेरी तकदीर हूं मैं
मैं तुम्हारी, जिंदगी हूं
ख्वाब की, ताबीर हूं मैं
म्यान से ,अब तक न निकली
वो कोई, शमशीर हूं मैं
प्यास की, कोई तड़प हूं
और, बहता नीर हूं मैं
दूर मुझको,ढूंढता क्या
तेरे,बगलगीर हूं मैं
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1 hour ago

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