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मैं हकीक़त नहीं तस्वीर हकीकत की हूं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            आईना सा मुझे कुदरत ने बनाया क्यों है
        
                                                    
                            
सामने जो है उसका अक्स नुमाया क्यों है
आते जाते ठहर के लोग देखते हैं मुझे
ऐसा इल्ज़ाम सबने मुझपे लगाया क्यों है
टूट जाऊं न मैं इस बात की तस्दीक करो
पत्थरों ने इधर फिर सर को उठाया क्यों है
मैं हकीकत नहीं तस्वीर हकीकत की हूं
आग पानी में लगाकर न बुझाया क्यों है
वो जो जाहिर में मुझसे मुंह घुमा के रखता है
मेरी तस्वीर को सीने से लगाया क्यों है
तुम तो हर बात में कहते हो कोई बात नहीं
बात ऐसी है तो बोलो न खुदाया क्यों है
एक घंटा पहले
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