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बेवफ़ा होकर भी दुआ देती है

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            दस्त ए तन्हाई भी किस किस को सदा देती है
        
                                                    
                            
जिंदगी अब बेवफा होकर भी दुआ देती है
अब हवा चलने लगी अब न ये चराग़ बुझे
इसकी गुस्ताखियां परदे भी उड़ा देती है
कोई नाचीज कब नजरों को लुभा लेती है
मुझको अपनी अना नज़रों से गिरा देती है
अश्क बेवक़्त ही आंखों में उतर आते हैं
बेख़याली हमें बेवक़्त रुला देती है
आजमाइश हुई इस बार मेरी किस्मत की
जो खयालों में भी तुमको ही बुला लेती है
जिस्म से रूह तक का सफर मुश्किल था जरा
मंज़िलें राही के कुव्वत का पता देती हैं
आग से खेलने का शौक हमें था ज्यादा
ऐसी लगी रौशनी कम ज्यादा धुंआ देती है
4 घंटे पहले
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