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इस मुकाम पे हूं दुनिया को मेरे कदम गिनने तय हैं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            उल्फ़त की जागीर मिली है,दुश्मन भी मिलने तय हैं
        
                                                    
                            
दिल में वो तूफान उठा है कुछ दरख़्त गिरने तय हैं
तू जाएगा जिधर, निगाहें कई ठहर तो जाएंगी
एक सुहानी हवा चली है पत्ते तो हिलने तय हैं
उजड़े चमन में ठहरी खिजाओं ने मुझको दी आवाजें
बादे सबा के जैसी छुअन है फूल कई खिलने तय हैं
एक सदी के बाद मिली है इत्मीनान की यह मंजिल
सभी थकन मिटने को हैं ही जख्म सभी सिलने तय हैं
चर्चा है सबमें मेरी या मुझसे जुड़ी सब बातों की
इस मुकाम पे हूं दुनिया को मेरे कदम गिनने तय हैं
एक महीने पहले
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