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सबकी निगाहें ही मुझ पर हैं

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            मुझपे तेरा इतना असर है
        
                                                    
                            
सबकी निगाहें ही मुझ पर हैं
चांदनी फैली है धरती पर
बिजली जैसी उजली डगर है
मैं परदेश में हूं लेकिन मन
रोज पहुंच जाता घर पर है
शोला,कौन है कौन है शबनम
तुझमें मुझमें क्या अन्तर है
तेरी पनाहों में हूं आया मै
तेरा हाथ मेरे सर पर है
कुछ कहना भी शेष नहीं है
जो होता है तेरी नज़र है
एक महीने पहले
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