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सूरत जो हुबहू तेरी सूरत की तरह है

Anil Pandey

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अपनी खबर नहीं है मगर तेरी फिकर है
        
                                                    
                            
ये बेखुदी का सफर भी कैसा ही सफर है
मेरी नजर तुझे ही सदा खोजती रहती
ये बात और है कि सबकी मुझपे नजर है
तू खुश है सलामत है हर अज़ाब से महफूज
मालूम नहीं तुझे किसी दुआ का असर है
हासिल है मुझे दुनिया की सारी नियामतें
दुनिया में मेरी फिर भी सिर्फ तेरी कसर है
आता है मुझे ख्वाबों में चेहरा भी जो नजर
सूरत जो हुबहू तेरी सूरत की तरह है
दीवानगी बढ़ी तो आईने ने ये कहा
मेरे सिवा दुनिया में किसे तेरी कदर है
साहिल से देखता हूं मैं मौजों कि रवानी
ऊंघता हुआ मंजर,कोई गुमसुम सी लहर है
मर जाएगा या जी उठेगा मर के भी देखो
फ़िर पी लिया किसी ने जिंदगी का जहर है
एक घंटा पहले
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