अपनी खबर नहीं है मगर तेरी फिकर है
ये बेखुदी का सफर भी कैसा ही सफर है
मेरी नजर तुझे ही सदा खोजती रहती
ये बात और है कि सबकी मुझपे नजर है
तू खुश है सलामत है हर अज़ाब से महफूज
मालूम नहीं तुझे किसी दुआ का असर है
हासिल है मुझे दुनिया की सारी नियामतें
दुनिया में मेरी फिर भी सिर्फ तेरी कसर है
आता है मुझे ख्वाबों में चेहरा भी जो नजर
सूरत जो हुबहू तेरी सूरत की तरह है
दीवानगी बढ़ी तो आईने ने ये कहा
मेरे सिवा दुनिया में किसे तेरी कदर है
साहिल से देखता हूं मैं मौजों कि रवानी
ऊंघता हुआ मंजर,कोई गुमसुम सी लहर है
मर जाएगा या जी उठेगा मर के भी देखो
फ़िर पी लिया किसी ने जिंदगी का जहर है
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X