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तिरंगे में

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हर पल है पर्व यहाँ भगवन,सुख-दुख मिश्रित जीवन भगवन
        
                                                    
                            
इस पुण्य भूमि पर जन्म मिला,हमको है गर्व सदा भगवन
रंग जाए यह जीवन,जय हिंद रस रंगे में
तन लिपटे अंत समय, तो सिर्फ तिरंगे में
तन लिपटे•••••

इस पावन धरती से, अब तक है सिर्फ लिया
पछतावा है मन में, कुछ भी न धरा को दिया
चंदन यह मिट्टी है, लथपथ हो तन इसमें
मन उलझ न हर्गिज,कहीं रंग-बिरंगे में
तन लिपटे अंत समय, तो सिर्फ तिरंगे में

हर एक की जिह्वा गाए,यशगान तिरंगे की
हर एक के दिल में हो, सम्मान तिरंगे की
अपने इस जीवन की, बस एक तमन्ना है
इस धूल में अस्थि मिले,चाहें जाए न गंगे में।
तन लिपटे अंत समय, तो सिर्फ तिरंगे में।

- पंडित अनिल
एक दिन पहले
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