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सुप्त हुई

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            *सुप्त हुई*
        
                                                    
                            

कैकयी-मंथरा न लुप्त हुई,
आज भी कुमति में गुप्त हुई।
आज भी कर रही हैं वनवासी,
रममय मेधा है सुप्त हुई।।
-पंडित अनिल
3 महीने पहले
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