जय अम्बे, जय जगदम्बे,
जय-जय माँ कल्याणी।
नौ रूपों में सजी हुई माँ,
तू जग की महारानी॥
शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी,
महिमा अति सुखकारी।
चंद्रघंटा,कूष्मांडा माँ,
हरतीं विपदा सारी॥
स्कंदमाता, कात्यायनी,
भक्तों की रखवाली।
कालरात्रि, महागौरी माँ,
महिमा सबसे निराली॥
सिद्धिदात्री वर देने वाली,
भर दो झोली खाली।
तेरे द्वारे शीश झुकाएँ, माँ,
सुन लेना अरजी हमारी॥
ढोल बजें, मँजीरे बाजें,
गूँजे जय-जयकार।
लाल चुनरिया ओढ़ के आओ,
माँ, खोलो सुख के द्वार॥
-पंडित अनिल