हिंदी भारत माँ के माथे की सुंदर-सी बिंदी है,
जन-जन के मन की धड़कन, सबसे प्यारी हिंदी है।
गाँवों की चौपालों से संसद तक सम्मानित है,
शब्दों में संस्कार लिए, हर दिल में यह स्थापित है।
तुलसी की भक्ति इसी में, संत कबीर की वाणी है,
प्रेमचंद की कलम में,भारत माँ की अमर कहानी है।
रसखान की प्रेम-पुकार है, मीरा का विश्वास है,
हिंदी में ही मिलता हमको अपनेपन का एहसास है।
माँ की ममता, पिता का प्रेम,सब कुछ तो मिल जाता है,
दूर खड़ा इंसान भी हिंदी से, अपना बन जाता है।
आओ आज प्रण कर लें हम, इसका मान बढ़ाएँगे,
अपने घर से विश्व-पटल तक हिंदी को पहुँचाएँगे।
भाषा नहीं, यह तो भावों की जीवंत पहचान है,
हिंदी की अमिट शान है, जय हिंदी हिंदुस्तान है।
-पंडित अनिल