आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हिंदी का जयगान

                
                                                         
                            हिंदी भारत माँ के माथे की सुंदर-सी बिंदी है,
                                                                 
                            
जन-जन के मन की धड़कन, सबसे प्यारी हिंदी है।

गाँवों की चौपालों से संसद तक सम्मानित है,
शब्दों में संस्कार लिए, हर दिल में यह स्थापित है।
तुलसी की भक्ति इसी में, संत कबीर की वाणी है,
प्रेमचंद की कलम में,भारत माँ की अमर कहानी है।

रसखान की प्रेम-पुकार है, मीरा का विश्वास है,
हिंदी में ही मिलता हमको अपनेपन का एहसास है।
माँ की ममता, पिता का प्रेम,सब कुछ तो मिल जाता है,
दूर खड़ा इंसान भी हिंदी से, अपना बन जाता है।

आओ आज प्रण कर लें हम, इसका मान बढ़ाएँगे,
अपने घर से विश्व-पटल तक हिंदी को पहुँचाएँगे।
भाषा नहीं, यह तो भावों की जीवंत पहचान है,
हिंदी की अमिट शान है, जय हिंदी हिंदुस्तान है।
-पंडित अनिल
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
13 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर