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दोस्ती कर रहे हैं

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            नफ़ा देख कर दोस्ती कर रहे हैं
        
                                                    
                            
वो अब इस तरह आशिक़ी कर रहे हैं।

जो रिश्ते पुराने हुए अब न उनसे
कभी भूल कर बात भी कर रहे हैं।

घराना बड़ा है बड़ा नाम उनका
हैं बूढ़े मगर दिल्लगी कर रहे हैं।

ज़ुबाँ में शहद है मगर दिल है शातिर
शराफ़त हैं ओढ़े ठगी कर रहे हैं।

बड़े तर्क से झूठ कहते हैं साहब
हरिक बात अपनी बड़ी कर रहे हैं।
-पंडित अनिल
3 महीने पहले
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