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बसर होती है

Anil Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बसर होती है
        
                                                    
                            

हर घड़ी दिल पे गड़ी तीर नज़र होती है
ज़िंदगी अपनी तो ऐसे ही बसर होती है।

ग़म की आँधी ने मिरे दीप बुझाए अक्सर
यूँ सिसकते हुए भी अपनी सहर होती है।

सिर्फ हँसना ही ज़माने को दिखा है हरदम
कौन देखेगा कि ये आँख भी तर होती है।

वक़्त पे काम नहीं आते हैं कहने वाले
आस जिनसे हमें आठो ही पहर होती है।

घर में पर्दे कभी कपड़ों के लगा करते थे
अब तो शीशों की परत और शरर होती है।

 
2 महीने पहले
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