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बसर होती है

                
                                                         
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हर घड़ी दिल पे गड़ी तीर नज़र होती है
ज़िंदगी अपनी तो ऐसे ही बसर होती है।

ग़म की आँधी ने मिरे दीप बुझाए अक्सर
यूँ सिसकते हुए भी अपनी सहर होती है।

सिर्फ हँसना ही ज़माने को दिखा है हरदम
कौन देखेगा कि ये आँख भी तर होती है।

वक़्त पे काम नहीं आते हैं कहने वाले
आस जिनसे हमें आठो ही पहर होती है।

घर में पर्दे कभी कपड़ों के लगा करते थे
अब तो शीशों की परत और शरर होती है।

 
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2 महीने पहले

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