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बंजर है ज़मीं मेरी, ज़रा रहम कीजिए

Anant Taksale

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            डूबती इन आँखों को न तरसाया कीजिए,
        
                                                    
                            
पुकारती है रूह मेरी, तो आ जाया कीजिए।
भीगी ज़ुल्फ़ों से बरसाते हो बारिशें तुम,
बंजर है ज़मीं मेरी, ज़रा रहम कीजिए।
2 महीने पहले
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