नहीं जरा भी मान मोह है
ना जाने सुख दुख का नाम,
मनमतंग मतवाला ऐसा
नहीं किसी से कोई काम ।
मिल जाए गर दो ही रोटियां
खाकर खुश हो जाते हैं,
वरना फेंक चैन से लेटें
सार्थक करते अपना नाम ।
ठंड धूप चाहे वर्षा हो
बच जाए तो बच जाते हैं,
वरना मर ही तो जाना है
पी जो लिया जहर का जाम ।
जोड़ तोड़ में लगे रहेंगे
नहीं काल की चिंता है,
पड़े रहेंगे कहीं सहोदर
चाहे सुबह हो या शाम ।
- आनन्द गुर्जर सहोदर