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सफर सफर सफर

Anand Ahire

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            हम निकल तो पड़े हैं राहों में अब ना जाने कहा जाना होगा,
        
                                                    
                            
ना जाने मंजिल कहाँ होगी ना जाने कहाँ ठिकाना होगा,
दिल है के अब भी परेशान है कोई बता दे हमें उसने देख के
पहचाना होगा,
वक़्त है के फ़िसलता जा रहा है हाथों से रेत की तरह क्या याद
उसको गुज़रा जमाना होगा,
उमर चलते चलते थक गई है उम्मीद मे मेरी
क्या अब गहरी नींद के लिए कोई सरहाना होगा,
कशमकश है जिंदगी के सफर में बड़ी जो दिखाये हमें हकीकत
क्या किसी के पास वो आईना होगा,
क्या चुन लिया है रास्ता गलत हमने क्या फिर से हमें आगाज़ से
अंजाम तक जाना होगा,
ना जाने मंजिल कहाँ होगी ना जाने कहाँ ठिकाना होगा,
हम निकल तो पड़े हैं राहों में अब ना जाने कहां जाना होगा,
- आनंद 
2 वर्ष पहले
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