आँखें जो छलकी - छलकी जाए तो क्या कीजिए
खुशनुमा नहीं गर्दिशों से भर समा है
चारों तरफ तो क्या कीजिए
जिंदगी तू क्यूं खफ़ा खफ़ा है
कोई तो इतना बता दीजिए
रास ना आए जो मय और मयखाना
तो कहां जाएं ऐ ग़म भूलाने
के लिए हो सके तो सलाह दीजिए
इस पार तो तन्हाई है उस पार
नसीबा से सुकून मिल जाए
दुआ कीजिए ।
-अनामिका