सच्चे और अच्छे इंसानों की क़दर नहीं ज़माने में
नेकी कर -- कर हाथ जलाने वाला बदनाम
है ज़माने में
सूरत के पीछे भागता है ज़माना
सीरत वाले का जिक्र बस होता है ज़माने में
वादे वफ़ा का ढोल पीटने वाले भी
ऊब जाते है इक वक़्त के बाद
ऐसे भी लोग देखें है हमने ज़माने में
अच्छा न हो तो दोष सारा ख़ुदा का
अच्छा हुआ तो खुद डंका बजाते लोग
ज़माने में
गैरो आखिर गैर ही होते है , उनसे शिकायत कैसी
विपरीत समय में अपने भी बदल जाते है
ज़माने में !!