तू मेरा नसीब नहीं मालूम है मुझे
तुझ पे चाहूं तो भी कोई हक नहीं मेरा
मालूम है मुझे।
रूठ जाता हे तू मेरी खामोशी से
कैसे मानना है तुझे
मालूम है मुझे
मेरे इनकार पे भी तू मेरा इकरार समझना
पूरा ना सही लम्हों में ही ज़ी लूं तुझे
इतना तू अज़ीज़ है मुझे ।