मैं भीगने को तैयार था ।
मुहब्बत की बारिश में
इश्क का बादल आ के कहीं ओर बरस गया
सुख कर थार बन गई मेरे दिल की जमीं
दिल का घरौंदा टूट कर तार - तार रह गया