हर मन में बसा है मोरा सुंदर श्याम सावरा
दिल चुराने की कला में माहिर हैं
मोरा सुंदर श्याम सावरा
हर मन में बसा हैं मोरा सुंदर श्याम सावरा ।
भटक - भटक कर थक गई जब मैं
तेरे चरणों में जब अर्पण कर दिया खुद को
तो चैन सुकून मै पा गई , ओ मोरा सुन्दर श्याम सावरा
मन मोहने वाले , ओ मुरलीधर मुरारी
स्वीकार कर लो ओ विनती हमारी
जैसे बसे हो मन में मोरे वैसे अपने चरणों में
मुझको भी बसा लो ओ ओ मोरा सुंदर श्याम सावरा
हर मन में बसा मोरा सुंदर श्याम सावरा
मोरा सुन्दर श्याम सावरा
तुझको फूलों की माला अर्पित
-अनामिका