मोबाइल में विश के दो शब्दों ने
अपनों को अजनबी तो अजनबियों को अपना
बना दिया ।
एक दौर था जब घर पर , दादा - दादी
माता - पिता , चाचा - चाची ,
सब के बच्चे एक साथ एक घर में
रहा करते थे
एक चूल्हे पे बनता था भोजन
समय बदला , दादा - दादी गांव
में रह गए माता - पिता , चाचा - चाची
कमाने खाने अलग - अलग शहरों में
बस गए।
तीज त्योहार में मिलना हुआ तो ठीक नहीं
तो मोबाइल तो है विश कर दिया
पर इस विश ने अपनों से अपनों
को कितना दूर कर दिया।
अगर मोबाइल नहीं होता तो
मिलने जाते एक साथ मिलकर
तीज त्योहार मनाते ।
वहीं इस मोबाइल ने एक अजनबी को
दूसरे अजनबी के कितने करीब ला दिया
गुड मॉर्निंग विश से गुड नाईट तक
और दूसरे मौकों पर विश कर के
दिल खुशी से झूम जाता है
जैसे कि वो अजनबी बिल्कुल करीब हो
वाह क्या कहने मोबाइल के !!