कुछ लोगों को बताना बहुत जरूरी होता है
कि उनकी काबिलियत नहीं थी की वे अर्श पे बैठे
ऐसे ही नहीं लिखा गया कि अल्लाह मेहरबान तो
गधा पहलवान !
मेरी भी अर्ज़ है , हे ख़ुदा, उन बेचारे घोड़ों की
क्या खता वे तो अपना कर्म ईमानदारी से कर रहे थे
आपने ही किस्मत के चलते गधों को पहलवान बना दिया !!