हाले दिल में छिपे कुछ जज़्बात है ।
कहो तो कह दूं , या कह दो चुप ही रहूं
फिसल रहे मेरे लबों से जो वो मेरे एहसास है
अब भी अगर खामोश किया तुमने
ऐ अनामिका तो शायद फिर ना कभी
मुलाकात होगी , मुकम्मल ना फिर कभी
मुहब्बत की ये सौगात होगी
हाले दिल में छिपे कुछ जज़्बात है ।
आंखों से जो छलक रही प्यास है
धड़कनों में दबी सी वो आस है
मदहोश हो रहा ये शमा
बस तेरी इक हां पे टिका अब मेरा सारा जहां
हाले दिल में छिपे कुछ जज़्बात है
कहो तो कह दूं , या कह दो चुप ही रहूं ।