टेढ़ी मेढ़ी पगडंडी , छोटा सा पोखर
अमिया का पेड़ , पीपल की छांव
चार कमरों का स्कूल , दो कमरों हस्पताल
ये सब तो हर गांव में मिल जाएगा ।
नहीं मिलेगे तो हमार जुम्मन चचा
ओर उनकी दाढ़ी के सुनहरे बाल
गांव में सपने में भी किसी ने उनकी दाढ़ी में
सफेद बाल नहीं देखे , तौबा तौबा सपने
की भी इतनी जुर्रत ।
जब जुम्मन चचा अपनी सुनहरी दाढ़ी में हाथ फेरते
गांव में निकलते तो लगता कोई बादशाह सैर पर निकला हो ।
जुम्मन चचा सिर्फ अपनी दाढ़ी के लिए नहीं
अपनी दरिया दिली के लिए भी सब की जान थे
हर परेशानी का चुटकी में हल निकाल लेते
दूसरे का दुख अपना मान कर उनको संभाल लेते
ऐसे हे हमार जुम्मन चचा
सच कहे तो जुम्मन चचा ओर उनकी दाढ़ी के सुनहरे
बाल सदा दमकते रहे।