ये जो धूप - छांव है
हमें बताती है कि
समय का पहिया
घूमता हे कभी स्थिर नहीं होता
एक पल जहां दुख आता है
वहीं दूजी पहर हमें सुख आने की अनुभूति
भी होती है
क्योंकि सदा पतझड़ नहीं होता
जब पतझड़ में पत्ते झरते है तो वे हमें
नव जीवन के आगमन की सूचना देते है
तभी फिर से नई कपोले आ कर हरियाली और
बहार लाती है
ये निरंतरता बनी रहती है
कभी ठहराव उत्पन्न ही नहीं होता
क्योंकि जीवन गतिशील है
ये गतिशीलता ही हमारा अस्तित्व बरकार रखती है ।