जब जुबां न बोले , तुम मेरी खामोशी को पढ़ लेना !
शिद्दत है कितनी मुझे इस पे न कोई भरम करना !!
टूट कर तुमको चाहा है मगर चाहत का मिलना
न मिलना मुकद्दर का खेल है सनम !
इस जमीं में जो न मिले तो आसमा में मिल लेना !!