विज्ञापन

इस सफ़र को मंज़िल ज़रूर मिलेगी

Anamika singer

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            ज़िंदगी मुझे कभी मंज़िल तक पहुंचती ही नहीं
        
                                                    
                            
इक मोड़ खत्म होने वाला जब होता है
लगता है शायद अब मंज़िल से रूबरू हो जाऊंगी
पर ये भरम टूट जाता है जब इक नया मोड़
नज़र आता है
ये क्रम जाने कब से चला आ रहा है
मै निरंतर चले जा रही हूं इसी सोच के
साथ , अबकी बार इस मोड़ के खत्म होते ही
मंज़िल के साक्षात दर्शन होंगे
जाने कितने लोग राहें सफ़र में मिले
और बिछड़ गए , आज भी नए अजनबी
लोगों के साथ आगे बढ़ रही हूं
पर पर बिन उम्मीद के , न किसी से कोई वादा
न किसी से कोई अनुग्रह साथ चलने का
अगर उम्मीद है तो खुद से कि इक दिन
इस सफ़र को मंज़िल ज़रूर मिलेगी !!
7 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

Nema Ram

141 कविताएं

View Profile