क़ुदरत का सबसे हसीं सबसे अनमोल उपहार हूं
हां मैं मुहब्बत हूं
दिल तो पहले भी धड़का करता था
उस धड़कन का एहसास मैं करती हूं
अंखियों को कंगना को
पायल को बोलना मैं सीखती हूं
आईना देख के शर्माना
बारिश में भीगना
खुद से खुद बातें करना
गुनगुनाना सब मैं सीखती हूं
क़ुदरत का सबसे हसीं सबसे अनमोल उपहार हूं
हां मैं मुहब्बत हूं !!