मुहब्बत के लिए जमीं कम पड़ रही
नफ़रत फिर क्यूँ फैला रहे लोग
जाति - पाती का भेद मिट गया
पढ़ा हमने अखबारों में , फिर क्यूँ
मज़हब , धर्म के नाम पर खून बहा रहे हैं लोग
ये जमीं ये आसमा सब ख़ुदा की देन है
फिर क्यूँ इस पे हक अपना जता रहे है लोग
ईश्वर भी ख़ुदा भी बांटता है अमन चैन हमें ,
फिर क्यूँ ये बात समझ नहीं पा रहे है लोग