विज्ञापन

डिजिटल इंडिया है भाई सहाब

Anamika singer

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            डिजिटल इंडिया है भाई सहाब , बहनजी
        
                                                    
                            
मैं कुछ कहूं तो चौंकिए मत
डिजिटल इंडिया न केवल मेट्रो में
शहरों में गांव में भी अपनी छाप
छोड़ चुका है ।
डिजिटल इंडिया ये पढ़ने सुनने में
ही आनंद दाई है , कभी किसी को
भारत मां की सिसकियां सुनाई दी
कुछ लोगों को आज भी
तन ढकने के लिए कपड़ो की बात तो दूर
दो वक़्त के निवाले भी नसीब नहीं होते
हा मान लिया ,अब देश की बेटियां
आकाश छू रही है , पर आज भी
उनके साथ हो रही गलत वारदातों से
अखबार भरे पड़े है ।
हा भाई सहाब , बहन जी डिजिटल इंडिया है
अब तो सारे काम ऑनलाइन हो रहे
रिश्ते बनते - बिगड़ते सब ऑनलाइन
बचपन अब बच्चों में भी नज़र
आता नहीं , रील बनाने में अब वो
बचपना खो रहे है।
गया ज़माना लैला मजनू , हीर रांझा का
सात फरवरी से चढ़ता है प्यार परवान
चौदह फरवरी तक की धूम - धाम
पन्द्रह फरवरी उतरता जाता प्रेम
का खुमार।
सही सुना भाई सहाब बहन जी
डिजिटल इंडिया बन गया इंडिया अब तो
रीति - रिवाज़ , संस्कार , संस्कृति की
बाते गई चूल्हे में या तेल लेने
आंखे चार की प्यार हो गया
झट मांगनी पट ब्याह हो गया
थोड़ी नोक झोंक में इतना लंबा तकरार
हो गया ,कोर्ट कचहरी हुई तलाक़ नामे में
दस्तख़त हुआ , हो गए रस्ते अलग अलग
दो दिन की मुहब्बत में हुए बच्चों का
जीवन दुश्वार हो गया।
डिजिटल इंडिया है भाई सहाब बहन जी।
क्या इतना काफ़ी है ,या बोलो तो और बोल दूं !!
6 महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Rajiv Tyagi

423 कविताएं

View Profile

Anil Kumar

4215 कविताएं

View Profile

Sanjay Nirala

42 कविताएं

View Profile

RATAN KUMAR

616 कविताएं

View Profile