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औरत बनाम पुरुष

Anamika singer

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            अमर उजाला की सभी सखियों
        
                                                    
                            
के लिए ये बात लागू नहीं है ।
पर अक्सर औरत ही औरत की दुश्मन होती हैं
ये हमने सुना पढ़ा।
घर - परिवार की बात करूं तो
अगर सास सीधी और अच्छी है
तो बहु उसके अपने खून यानी बेटे को
उसकी जन्मदायिनी मां से अलग कर देती है
बहन जैसी नन्द को पीहर आना बंद करवा देती है
नतीजा बेटा मां - बाप दोनों को वृद्धा आश्रम
छोड़ आता है ।
अगर बहु सीधी हो तो सास उसका जीना दुश्वार कर देती है , बहन जैसी नन्द अपनी भाभी के साथ
दुश्मन से भी बत्तर व्यवहार करती है।
कुछ के नतीजे यहां तक निकलते है , सास नन्द
के साथ परिवार बहु को मार तक देता है।
दोनों ही किस्से मै औरत ही औरत की दुश्मन निकालती है।
अगर कोई औरत अपने पति को अपनी सहेली से मिलवाए तो वही सहेली , उसकी सौतन बन जाती है
और उनका तलाक करवा देती है ।
किसी संस्था की बात करें तो वहां भी कर्मचारी औरतें
दूसरी कर्मचारी औरत को आगे बढ़ता देख उसकी बुराई या चुगली करना शुरू कर देती है।
ये बात पुरुषों में कम पाई जाती है वे अधिकतर घर के मामलों में पड़ते नहीं और आते भी है तो घर की औरतें
ही उन्हें घसीटती है , इसलिए कहा जाता है औरत ही
घर को स्वर्ग भी बनाती है नरक भी बनाती है।
पुरुष कभी अपने दोस्तों के साथ गद्दारी नहीं करता
कुछ लोगों को छोड़ कर , बस कुछ लोग जाति तौर पर
ऐसा भले कर दे , कृपया बुरा न माने इसलिए पुरुषों की जात पे कुछ संबोधन भी है , मैं कहूंगी नहीं, पर सब जानते है। मेरा ये मतलब भी नहीं कि औरत होके
औरत की तौहीन कर रही हूं , औरत की महानता के
चर्चों की बात कभी ओर करूंगी।
आज का औरत बनाम पुरुष कैसा लगा आपको
बताइए जरूर !!
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