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पुनः शपथ ले चलना होगा।

Amit premshanker

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धर्म की लाठी पकडे़े पकडे़े जीवन पथ पर चलना होगा
        
                                                    
                            
गिरना, उठना और संभलकर पुनः शपथ ले चलना होगा।

कांटे कंकड़,पर्वत खाई संकट सम्मुख आएंगे
कुछ कलियुगी कालनेमियां तेरा मन भटकायेंगे
मन के घोड़े साध स्वयं निज शोभित रथ पर चलना होगा
गिरना, उठना और संभलकर पुनः शपथ ले चलना होगा।

अभी दूर गंतव्य तेरा संघर्ष सतत करते जाओ
हृदय के संकल्प याद कर तेज सदा भरते जाओ
पानी खून पसीनों से ही लथपथ हो कर चलना होगा
गिरना, उठना और संभलकर पुनः शपथ ले चलना होगा।

- अमित प्रेमशंकर
एक महीने पहले
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