अच्छा है तू माँ मेरी बचपन में मुझको छोड़ गई
इस मतलबी दुनिया से पहले ही नाता तोड गई।
आज अगर तू होती तो,मेरे सर की बोझ बनी होती
मुझ जैसे बेटों से कितने दुर्वचन सुनी होती
तेरे किचकिच से तंग आकर माथा फोड़ गया होता
मैं झुंझलाकर वृद्ध आश्रम अबतक छोड़ गया होता।
शायद तुमको भान हुआ और पहले ही मुख मोड़ गई
अच्छा है तु माँ मेरी बचपन में मुझको छोड़ गई।
शब्दों के तिखे तीरों से छाती लहू बहाया होता
बूढ़ी नयनों में पानी दे, पानी को तरसाया होता
ऐसी करनी से मुझकर संसार ये थूक रहा होता
श्रेष्ठ समझने वाला मैं नजरों में झूक रहा होता
अपने लाल के लाज की खातिर लाली आंचल ओढ़ गई
अच्छा है तु माँ मेरी बचपन में मुझको छोड़ गई।
मर के भी तु माँ मेरी, मुझसे इतना तु प्यार कर गई
जीवन दान दिया तुमने, मेरा जीवन उद्धार कर गई
माँ तेरी इस ममता का कोई न कर्ज चुका पाया
निश्छल प्रेम की नदियों को कोई भी नहीं सूखा पाया।
मुझे कोई अपयश लगे न इसलिए घर छोड़ गई
अपना आंचल छिनकर मुझसे मुझको रोता छोड़ गई
अच्छा है तु माँ मेरी बचपन में मुझको छोड़ गई
इस मतलबी दुनिया से पहले ही नाता तोड गई।
- अमित प्रेमशंकर