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तुम याद क्या आये...

Amit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम याद क्या आए…
        
                                                    
                            

कुछ दिन पहले,
उदासी भी उदास थी,
ख़ामोशियों के होंठों पर
कोई गीत नहीं था…
आँखों में नमी थी,
और दिल में
एक अनकहा-सा दर्द था।

फिर न जाने कैसे
तुम याद क्या आए—
जैसे सूनी राहों पर
सवेरा उतर आया,
जैसे किसी बुझते दीपक को
हवा ने फिर से सहलाया।

तुम्हारी याद ने
मेरे भीतर के अँधेरों को छुआ,
और जाने कैसे
हर दर्द को
जीने की वजह मिल गई।

कुछ पल को लगा,
ज़िंदगी ने फिर मुस्कुराकर कहा—
**“अभी कहानी बाकी है…”**

सच तो यही है—
कभी-कभी किसी अपने की
सिर्फ़ एक याद ही काफ़ी होती है,
टूटे हुए मन को
फिर से जोड़ने के लिए…

क्योंकि
तुम याद क्या आए,
उदासी भी मुस्कुरा उठी…
-आचार्य अमित
एक महीने पहले
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