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बेवकूफी उसकी आला-ओ- अव्वल

Amit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            तुम्हारे बाद किसी को दिल में आने नहीं दिया
        
                                                    
                            
फूल से महक नहीं ली, पौधों को पानी नहीं दिया

ऐसा नहीं है कि मर गए तुम्हारे बगैर, मगर
खुद को तुम्हारे बगैर हमने जीने नहीं दिया

लाख दस्तक पड़ी हो दरवाजे पर तो क्या
हवा तक को कमरे में कभी आने नहीं दिया

झाड़ू नहीं फेरी कभी, आंगन नहीं बुहारा
तुम्हारे कदमों की आखिरी निशान मिटने नहीं दिया

तुमने जो फैसला किया वह मर्जी थी तुम्हारी
भूले से भी इस दिल को पछताने नहीं दिया

सिर्फ तुम्हें बतलाता हूँ जरा कान इधर लाओ
अपने मरने की खबर आज तक ज़माने को नहीं दिया।

 
एक महीने पहले
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