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बेवकूफी उसकी आला-ओ- अव्वल

                
                                                         
                            तुम्हारे बाद किसी को दिल में आने नहीं दिया
                                                                 
                            
फूल से महक नहीं ली, पौधों को पानी नहीं दिया

ऐसा नहीं है कि मर गए तुम्हारे बगैर, मगर
खुद को तुम्हारे बगैर हमने जीने नहीं दिया

लाख दस्तक पड़ी हो दरवाजे पर तो क्या
हवा तक को कमरे में कभी आने नहीं दिया

झाड़ू नहीं फेरी कभी, आंगन नहीं बुहारा
तुम्हारे कदमों की आखिरी निशान मिटने नहीं दिया

तुमने जो फैसला किया वह मर्जी थी तुम्हारी
भूले से भी इस दिल को पछताने नहीं दिया

सिर्फ तुम्हें बतलाता हूँ जरा कान इधर लाओ
अपने मरने की खबर आज तक ज़माने को नहीं दिया।

 
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4 घंटे पहले

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