मेरी बात फिर अधूरी रह गई
उसकी मुस्कुराहट में
फिर एक दूरी ढह गई
कुछ कहने की चाहत थी
मगर बात फिर अधूरी रह गई
कसम खाने और तोड़ने में
सारी रस्में बह गईं
लबों तक आई थीं जो बातें
वो आँखों में ही रह गईं
मेरी बात फिर अधूरी रह गई
उसका और मेरा
कोई रिश्ता नहीं है शायद
फिर भी हम दोनों के बीच
कुछ तो एक सा रिसता है
एक ऐसा रिश्ता
जो नाम और पहचान से परे है
जिसे शब्दों में बाँधना मुश्किल
जिसे समझना भी शायद अधूरा है
ये जो कुछ भीतर ही भीतर
चुपचाप रिसता रहता है
ये हर रिश्ते से परे है
फिर भी हर रिश्ते में दिखता है
उसकी आँखें मेरी आँखों से
न जाने क्या क्या कह गईं
मैं सुनता ही रह गया
और मेरी बात फिर अधूरी रह गई
मेरी बात फिर अधूरी रह गई
मैं जानता हूँ उसे
या शायद कभी ऐसा लगा था
मुझे लगा था
वो भी मुझे जान सकेगी
मैंने भी बहुत कुछ किया था
उस तक पहुँचने के लिए
मगर कुछ रास्ते
चलकर भी मंजिल तक नहीं जाते
फिर जान पहचान पुरानी हुई
और दूरी कुछ ऐसी बढ़ी
कि कल तक जो अपनी लगती थी
आज एक अनकही कहानी बन गई
उसकी अनकही दास्तान
मेरी परछाईं बनकर रह गई
वो मेरे साथ तो रही
मगर मेरी होकर भी न हो सकी
मेरी बात फिर अधूरी रह गई
पैसा खुदा तो नहीं है
मगर खुदा से कम भी नहीं
जिंदगी की कई मजबूरियों में
इसकी कमी छोटी भी नहीं
वैसे ही वो मुझसे जुदा तो है
मगर मुझसे जुदा भी नहीं
दूर होकर भी दिल के करीब है
और करीब होकर भी मेरा नही
शिकवे शिकायतें
किस रिश्ते में नहीं होतीं
ऐसी कौन सी बात है
जो हमने एक दूजे से नहीं कही
बहुत कुछ कहा हमने
बहुत कुछ सुना भी
मगर जो सबसे जरूरी था
वो शायद कभी कहा ही नहीं
सब कुछ कहकर भी
कुछ बात मन में ही रह गई
आँखें नम हुईं
मुस्कान ठहर गई
और फिर
मेरी बात फिर अधूरी रह गई
शायद हर कहानी का
पूरा होना जरूरी नहीं होता
कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी
दिल में कहाँ ठहरते हैं
कुछ लोग मिलते हैं
हमें पाने के लिए नहीं
बल्कि हमें
खुद से मिलाने के लिए
कुछ बातें कही नहीं जातीं
बस महसूस की जाती हैं
कुछ दूरियाँ मिटती नहीं
बस जीना सिखा जाती हैं
और शायद यही
इस रिश्ते की सबसे खूबसूरत सच्चाई है
जो अधूरा रह गया
वही सबसे गहरा रह गया
आज भी जब उसकी मुस्कुराहट
यादों के दरवाजे पर दस्तक देती है
दिल कुछ कहना चाहता है
मगर शब्द फिर खामोश हो जाते हैं
और मेरी बात
फिर अधूरी रह जाती है
-आचार्य अमित