विज्ञापन

एक दिन हम भी बरसेंगे

Amit Kumar

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            बरस जाते हो तुम
        
                                                    
                            
बिन बारिश के अक्सर,
मगर एक बात याद रखना,
कभी हम भी बरसेंगे…
और उस दिन सिर्फ़ आँखें नहीं,
हमारे ख़ामोश एहसास भी बरसेंगे।

उम्मीद के अनगिनत तरन्नुम,
जो आज भी दिल की गहराइयों में,
किसी अनकही दास्ताँ की तरह
तह-दर-तह दफ़्न पड़े हैं,
एक दिन उन्हें भी आवाज़ मिलेगी,
उनके ख़्वाबों को भी परवाज़ मिलेगी,
और हमारे सब्र की स्याही से लिखे
कुछ ऐसे हस्ताक्षर उभरेंगे,
जो तुम्हारे सीने पर नहीं,
तुम्हारी रूह तक उतरेंगे।

यूँ ही नहीं होता किसी से
दिल का लगाना साहिब!
यह कोई खेल नहीं,
जिसे हँसकर खेल लिया जाए,
और हार जाने पर
आसानी से भुला दिया जाए।

दिलों के रिश्ते बनाने में
कुछ छोड़ना भी पड़ता है,
कुछ तोड़ना भी पड़ता है,
कभी अपने अहम को,
तो कभी अपनी ज़िद को,
और कभी ख़ुद के भीतर पलते
किसी ख़ूबसूरत ख़्वाब को भी
ख़ामोशी से विदा करना पड़ता है।

तब जाकर कहीं दिलों की दरारें भरती हैं,
रिश्तों की बिखरी हुई किरचें
फिर से जुड़ने लगती हैं,
और मोहब्बत सिर्फ़ लफ़्ज़ नहीं,
एक-दूसरे को समझने का हौसला बन जाती है।

याद रखना, साहिब!
हर ख़ामोशी कमज़ोरी नहीं होती,
हर ठहरी हुई आँख बेबस नहीं होती,
और हर वो शख़्स जो आज
अपने दर्द को सीने में छिपाए बैठा है,
वो उम्रभर यूँ ही नहीं रहेगा।

कुछ दर्द वक़्त के साथ
दुआ बनकर खिलते हैं,
कुछ आँसू हौसलों में ढलते हैं,
और कुछ ख़ामोश लोग
जब अपनी क़िस्मत ख़ुद लिखते हैं,
तो उनके हस्ताक्षर
ज़माने की सोच बदल देते हैं।

इसलिए आज अगर हम ख़ामोश हैं,
तो इसे हमारी हार मत समझना…
हमारे भीतर भी एक समंदर है,
बस उसके किनारों को
अभी सब्र ने बाँध रखा है।

जिस दिन ये समंदर बरसेगा,
उस दिन सिर्फ़ मौसम नहीं बदलेगा,
हमारी पहचान बदलेगी,
हमारी कहानी बदलेगी,
और शायद तुम्हें भी एहसास होगा
कि दिल लगाना जितना आसान लगता है,
उसे निभाना उतना ही मुश्किल होता है।
-आचार्य अमित
3 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Ankit Kumar

10926 कविताएं

View Profile

Anil Pandey

478 कविताएं

View Profile