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सागर,नदियाँ हर पल,सदियाँ उसी के इशारे से चलती हैं।

Amit Ji

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            कण-कण में जिनका स्पंदन,
        
                                                    
                            
सदा करता हूँ मैं जिनका वंदन।

जो विश्व-व्योम का विस्तार हैं,
आदि-शक्ति वो महाशक्ति,जिनकी महिमा अपरम्पार है।

व्यापकता लिए माँ नव दुर्गा हर जगह उसकी परछाई है
हर नारी के रुप मे विस्तार लिए हर ह्रदय मे वही समाई हैं

धरती से लेकर अंबर तक, ब्रह्मांड के रूप में छाई हैं,
वो सृजन से लेकर संहार तक, हर प्रश्न की उत्तरदायी हैं।

वही सूर्य की उज्ज्वलता में, वही चंद्र की शीतलता में
हवाओं के बहते झर-झर में,वही नदियों की निर्मलता में

सूक्ष्म से विस्तार रुप मे जब-जब माँ ढलती हैं,
सागर,नदियाँ हर पल,सदियाँ उसी के इशारे से चलती हैं।
2 घंटे पहले
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