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टमाटर! टमाटर!' पुकारे आलू,

Amit Ji

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            प्यार में डूबे आलू को लौक गई लौकी की मुस्काई,
        
                                                    
                            
लुभा कर लौकि ने उसकी करा दी टमाटर से वेवफाइ

कद्दू-कटहल ने भी कर दी, दो रिश्तों की कटाई,
जुदा कर घोल दिया उनकी जिन्दगी मे खटाई।

दो रिश्तों में आ गई इतनी बड़ी खाई,
टमाटर-आलू में हो गई कइ महीनो की जुदाई।

सब्ज़ी-बाग में लगे लम्बे कतार,
आलू भटक रहा सरे-बाज़ार।

सब जगह ढूँढा,उसने टमाटर को घूम-घूम,
जाने कहाँ हो गई, उसकि टमाटर उससे गुम।

'टमाटर! टमाटर!' पुकारे आलू,
"आ भी जाओ, अब न बनेंगे कभी चालू।"
3 महीने पहले
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