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मा की महीमा अपरम्पार

Amit Ji

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            जब जब घंटी बजने लगे सजने लगे दरबार
        
                                                    
                            
अंधा लगे देखने लंगड़ा नाच के करे जयकार

नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता अते मा के द्वार
माँ के चरणों में जो झुकता है, सारा जग सारा संसार

मंदिर मे दर्शन पाके होते सबके शुद्ध विचार।
बिगड़ी हुइ बात बनती मा की महीमा अपरम्पार
2 दिन पहले
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