जब जब घंटी बजने लगे सजने लगे दरबार
अंधा लगे देखने लंगड़ा नाच के करे जयकार
नामुमकिन भी मुमकिन हो जाता अते मा के द्वार
माँ के चरणों में जो झुकता है, सारा जग सारा संसार
मंदिर मे दर्शन पाके होते सबके शुद्ध विचार।
बिगड़ी हुइ बात बनती मा की महीमा अपरम्पार
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