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खत्म हो रहा रिश्तो मे पानी

Amit Ji

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            फल भी लगते घर भी बनते
        
                                                    
                            
आती उनपे हरी जवानी
स्वार्थ का दिमक लगा जबसे
खत्म हो रहा रिश्तो मे पानी

सुख चुके रिश्तो के पेड
मर्यादा का अब रहा ना मेड
देख दुनिया के बदलते रिश्ते
इन्सान बन रहे है भेड

स्वार्थ का परीणाम पतन,त्याग एक उत्थान है
कपटहीन निश्छल ह्रदय,भगवान का स्थान है
3 घंटे पहले
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