विज्ञापन

हर हर गंगे का जयकार हुआ।

Amit Ji

Mere Alfaz
                                    
                                                                        
                            धरती पर आगमन होते ही
        
                                                    
                            
एक हलचल और हुंकार हुआ।
तूफान सा तीव्र जब धार हुआ,
सागर जैसा आकार हुआ,
हर हर गंगे का जयकार हुआ।

गंगा का जब विस्तार हुआ,
धरती का ये उपहार हुआ।
गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, काशी तक,
तृप्त पवित्र सारा संसार हुआ।
हर हर गंगे का जयकार हुआ।
21 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anita Dasani

15 कविताएं

View Profile

Ankit Kumar

10521 कविताएं

View Profile