धरती पर आगमन होते ही
एक हलचल और हुंकार हुआ।
तूफान सा तीव्र जब धार हुआ,
सागर जैसा आकार हुआ,
हर हर गंगे का जयकार हुआ।
गंगा का जब विस्तार हुआ,
धरती का ये उपहार हुआ।
गंगोत्री, हरिद्वार, प्रयागराज, काशी तक,
तृप्त पवित्र सारा संसार हुआ।
हर हर गंगे का जयकार हुआ।